November 2, 2026
Dharamshala

कंगना बनाम विक्रमादित्य सिंह: मंडी से कौन मारेगा बाज़ी, बॉलीवुड की ‘क्वीन’ या हिमाचल के ‘प्रिंस’

कंगना और विक्रमादित्य एक-दूसरे पर तीखे ज़ुबानी हमले कर चुके हैं. कई बार उनके बयान निजी हमलों की शक्ल में भी होते हैं.

जहां विक्रमादित्य सिंह ने कंगना रनौत को ‘मौसमी राजनेता’ बताते हुए उनपर बीफ़ खाने का आरोप लगाया, वहीं कंगना ने उनसे सबूत मांगते हुए उन्हें ‘छोटा पप्पू’ और ‘राजा बेटा’ कह दिया.

बयानों के मामलों में दोनों अभी तक एक से बढ़कर एक नज़र आ रहे हैं, लेकिन क्या वोटों के मामले में भी दोनों को कड़ी टक्कर मिलेगी?

इस बार मंडी लोकसभा क्षेत्र का चुनाव तीखी बयानबाज़ी के कारण मसालेदार होने वाला है, हालांकि इस सब का मतदाताओं पर कोई ख़ास असर नहीं होगा.

वहीं,कंगना के भाषणों को सुनें तो लगता है कि वह एक मंझे हुए राजनेता की तरह दिखने की कोशिश कर रही हैं. दूसरी ओर विक्रमादित्य की शैली भी ऐसी रहती है मानो वह बड़े अनुभवी हों. उनके बीच तीखी बयानबाज़ी हो रही है. वैसे तो पूरे हिमाचल में साक्षरता का स्तर अच्छा है, मगर मंडी के मतदाता राजनीतिक रूप से बहुत सजग हैं. ऐसी जागरूकता प्रदेश में कहीं और नहीं दिखती. ऐसे में इन बयानों से आधार पर तो मतदाताओं की राय पर कोई असर नहीं पड़ने वाला.”
2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर शतरंज की बिसात बिछ रही है। भारतीय जनता पार्टी ब कांग्रेस नेता शतरंज की चालों की तरह अपनी-अपनी चालें चल रहे है। भाजपा एवं कांग्रेस दोनों ही खेमों में अब हर दिन चुनावी रणनीति को लेकर शतरंज की चालें चलते हुए एक दूसरे को मात देने का दौर चल रहा है, सब अपनी-अपनी व्यूह रचना बना रहे

शतरंज में सफेद मोहरों की चाल पहले होती है और हर एक चाल की वरीयता मायने रखती है। ठीक इसी सोच पर भाजपा सभी चुनावी चालों में आगे रहना चाहती हैं। पर शुरुआत किस चाल से करें, जिसकी काट नहीं हो, यह भाजपा अच्छी तरह जानती हैं।

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