November 2, 2026
Dharamshala

चुनाव में जमानत जब्त होने का क्या मतलब है, इसके पीछे का क्या है गणित ? जानें सब कुछ

16 मई 2024 (ब्यूरो रिपोर्ट )

देश में ग्राम प्रधान से लेकर लोकसभा चुनाव तक में आपने कई बार एक कहावत जरूर सुनी होगी. “इनकी तो जमानत भी जब्त हो गई”. क्या आप जानते हैं कि चुनाव में जमानत जब्त होने का क्या मतलब है ? देश की चुनावी प्रक्रिया में इससे जुड़े क्या नियम कायदे हैं ? आज इसी जमानत जब्त को लेकर आपको पूरी जानकारी देते हैं. ताकि इस बार जब 4 जून को लोकसभा चुनाव का परिणाम आए तो आप भी ये आसानी से समझ पाएं कि किन-किन कैंडिडेट्स की जमानत जब्त हुई है.

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है. यहां ग्राम प्रधान से लेकर मेयर और सांसद से लेकर राष्ट्रपति तक का चुनाव वोटिंग से होता है. हर साल देश के किसी ना किसी कोने में कोई ना कोई चुनाव होता रहता है. ऐसे में किसी भी चुनाव को लड़ने के इच्छुक शख्स को चुनाव आयोग में जमानत के तौर पर एक निश्चित राशि जमा करनी होती है. फिर चाहे वो किसी पार्टी से संबंधित प्रत्याशी हो या फिर आजाद उम्मीदवार. ग्राम पंचायत से लेकर विधानसभा और लोकसभा चुनाव में जमानत के तौर पर अलग-अलग राशि तय है. जो चुनाव लड़ने के इच्छुक व्यक्ति को चुकानी होती है.

लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव के लिए जमानत राशि का जिक्र रिप्रेंजेंटेटिव्स ऑफ पीपुल्स एक्ट, 1951 में किया गया है. जबकि राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए जमानत राशि का प्रेसिडेंट एंड वाइस प्रेसिडेंट इलेक्शन एक्ट, 1952 में जिक्र है. इसके अलावा लोकसभा और विधानसभा चुनाव में जनरल कैटेगरी और SC/ST वर्ग के प्रत्याशियों के लिए अलग-अलग जमानत राशि तय की गई. जबकि, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के इलेक्शन में सभी कैटेगरी के कैंडिडेट के लिए एक तय राशि होती है.

कब होती है किसी प्रत्याशी की जमानत जब्त ?

किसी भी चुनाव में प्रत्याशियों की जमानत जब्त न हो इसके लिए उसे इलेक्शन में डाले गए कुल वैलिड वोटों की संख्या में से कम से कम 1/6 वोट से अधिक हासिल करने होते हैं. अगर कोई प्रत्याशी कुल वोटों की संख्या में से 1/6 से कम वोट हासिल करता है तो उसकी जमानत राशि जब्त हो जाती है और उसके द्वारा जमा की जमानत राशि को चुनाव आयोग जब्त कर लेता है. उदाहरण के तौर पर अगर चुनाव में एक लोकसभा सीट पर कुल एक लाख वोट पड़े हों. एक लाख वोट का 1/6 हिस्सा मतलब 16,666 वोट. यानी जो प्रत्याशी इस संख्या से कम प्राप्त करता है तो उसकी जमानत जब्त हो जाएगी और जो 25 हजार रुपये उसने जमानत के रूप में चुनाव आयोग को जमा करवाई थी वो उसे वापस नहीं मिलेंगे.

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