बैजनाथ 9 अक्तूबर
बैजनाथ जनपद के लिए ‘प्रधानजी’ के नाम से विख्यात किशोरी लाल किसी तार्रुफ और पहचान के मोहताज संभवत: इसलिए नहीं है क्योंकि गुरबत और गरीबी को करीब से देख चुका यह शख्स प्रदेश सरकार में मुख्य संसदीय सचिव बनने के बावजूद खुद को प्रधान कहलाना अपनी शान समझता है l बड़े ओहदे पर पहुंचने के बावजूद वह आज भी कभी शिव मंदिर में झाड़ू लगाते, कभी गाय की रखवाली करते, कभी खेतों में काम करते तो कभी पंडोल रोड में अपनी छोटी सी दुकान पर सिलाई मशीनें ठीक करते हुए गाहे-बगाहे दिख जाते हैं l यही नहीं 77 वर्ष की आयु पूरी कर चुका यह शख्स कभी अपने पुश्तैनी मकान स्लेटों को ठीक करता है तो कभी 3 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़कर लखदाता मंदिर के मेले में पारंपरिक वाद्ययंत्र टकम बजाने लगता है l जी हां! हम बात कर रहे हैं बैजनाथ के विधायक और प्रदेश सरकार के मुख्य संसदीय सचिव उसी किशोरी लाल की जिनके बुजुर्ग कभी रोजगार एवं बच्चों के सुखद भविष्य के लिए अपने अपने पुश्तैनी गांव लड़भड़ोल को छोड़कर बैजनाथ आ गए थे l यही वजह है कि जब कभी भी उनके पास बैजनाथ की दूरदराज छोटा भंगाल घाटी या फिर धार चढ़ियार जैसे चंगर क्षेत्र के लोग रोजगार या सड़क की समस्या को लेकर आते हैं तो वे उस समस्या को बारीकी से समझते हैं और उसका हल करने का प्रयास भी करते हैं। ऐसे विरले ही शख्स मिलते हैं जो रुतबे और संसाधनों के बावजूद आम जीवन जी रहे हैं। किशोरीलाल के करीबी बताते हैं कि जब कभी भी उनके पास कोई फरियादी आता है तो वे उसकी दिक्कत और मुसीबत को बड़े इत्मीनान से समझते हैं और उसका हल करने का प्रयास करते हैं।
देशभक्ति का जनून
किशोरीलाल बताते हैं बचपन से ही उन्हें देश भक्ति का जुनून था। 18 वर्ष के थे तो फौज में भर्ती हुए थे। ट्रेन का वारंट लेने के लिए मारंडा रेलवे स्टेशन जाना था लेकिन भारी बरसात की वजह से पालमपुर से आगे नहीं जा पाए। फौजी भाइयों की समस्याओं को वे प्राथमिकता से देखते हैं।
बेटियों के लिए छोड़ा पद
बेटियों के करियर की खातिर उन्होंने कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक के निदेशक का पद छोड़ दिया था l जब वे 1997 मैं कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक के निदेशक पद पर तैनात थे तो उनकी दोनों बेटियों ने बैंक की क्लैरीकल परीक्षा पास की थी। क्योंकि निदेशक के रहते उनकी बेटियां इस पद पर नहीं चुनी जा सकती थी।ऐसे में उन्होंने बेटियों के करियर के खातिर निदेशकमंडल से त्यागपत्र दे दिया।
राजनैतिक तजुर्बा भी अव्वल
वर्ष 1978 में उन्होंने जीवन का पहला चुनाव लड़ा था। 30 वर्ष तक बैजनाथ के प्रधान रहे। दो बार कांगड़ा सेंट्रल बैंक के निदेशक मंडल के सदस्य और ब्लॉक समिति सदस्य भी रहे। बैजनाथ विधानसभा आरक्षित होने पर उन्होंने 2012 में विधानसभा चुनाव जीता, 2017 में हार गए और 2022 में पुन: चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे।
शुरुआती दिनों से ही उनके साथ रहे मुल्ख राज मेहता, रमेश चड्डा, घनश्याम शर्मा, विनोद गुल्यानी, राकेश सूद, फुंगरी,किशोरी लाल कपूर,मिलाप राणा,सुदेश दीक्षित का कहना है कि किशोरी लाल शुरू से ही सादगी और संजीदगी से ओतप्रोत रहे हैं।
किशोरीलाल बताते हैं कि लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने जनता की सेवा और क्षेत्र के विकास को सर्वोपरि आंका है। उत्तराला होली मार्ग, छोटा भंगाल की देखभाल, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देना, शैक्षणिक संस्थान खोलना, रोजगार और स्वावलंबन को मजबूत बनाना, ठप्प पड़े कार्यों में तेजी लाना और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता लाना उनकी प्रमुख प्राथमिकता में शुमार है।
