हिमाचल प्रदेश में दीपावली की रात लोग 8 से 10 बजे के बीच ही ग्रीन पटाखे जला जा सकेंगे। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेशों के बाद यह फैसला लिया गया है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सभी जिलों के उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों को पत्र लिखकर आदेशों को सख्ती से लागू करवाने के निर्देश दिए हैं।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुसार साइलेंस जोन अस्पताल, नर्सिंग होम, प्राथमिक एवं जिला स्वास्थ्य केंद्र, शैक्षणिक संस्थान परिसर के 100 मीटर के दायरे में पटाखे फोड़ने पर पूर्ण पाबंदी है। वायु प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1981, ध्वनि प्रदूषण विनियमन और नियंत्रण नियम 2,000 और पर्यावरण सरंक्षण अधिनियम 1986 के उल्लंघन पर 5 साल कारावास या एक लाख रुपये जुर्माना हो सकता है। ग्रीन पटाखों में एल्युमिनियम व पोटेशियम नाइट्रेट जैसे रसायन नहीं होते। अन्य रसायनों की मात्रा भी इतनी कम रखी जाती है कि धुआं व प्रदूषण न्यूनतम हो।
एनजीटी ने वायु प्रदूषण के लिहाज से अति संवेदनशील शहरों में पटाखों पर प्रतिबंध लगाया है। जबकि मॉडरेट और सामान्य श्रेणी में आने वाले शहरों में सिर्फ ग्रीन पटाखे दो घंटे चलाने की छूट दी गई है। इन निर्देशों के तहत हिमाचल में लोग दो घंटे ग्रीन पटाखे जला सकते हैं – अनिल जोशी, सदस्य राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
