नई दिल्ली: डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल में नवगठित डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DOGE) ने भारत के चुनावों में मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए 2.1 करोड़ डॉलर के फंड में कटौती की है. इस कदम से नया सवाल उठा है कि आखिर अमेरिका विदेशों में लोकतांत्रिक भागीदारी को प्रभावित करने के लिए टैक्सपेयर्स के पैसे क्यों और कैसे खर्च करता.
सोशल मीडिया एक्स हैंडल पर एक पोस्ट में सरकारी दक्षता विभाग (DOGE) ने कहा कि वह भारत में मतदान के लिए 2.1 करोड़ डॉलर के आवंटन को रद्द कर रहा है. सरकारी दक्षता विभाग आधिकारिक तौर पर ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल की एक पहल है. इसका नेतृत्व टेक अरबपति एलन मस्क के हाथ में है.
सरकारी दक्षता विभाग अमेरिकी सरकार का कैबिनेट-स्तरीय विभाग नहीं है, बल्कि अमेरिकी सरकारी दक्षता विभाग सर्विस के तहत एक अस्थायी अनुबंधित सरकारी संगठन है. इसे पहले अमेरिकी डिजिटल सर्विस के नाम से जाना जाता था.
इसका उद्देश्य संघीय व्यय में कटौती और डीरेगूलेशन के ट्रंप के एजेंडे को लागू करना है. इसे स्थापित करने वाले आदेश के अनुसार गवर्नमेंट एफिशियंसी और प्रोडक्टिविटी को अधिकतम करने के लिए फेडरल टोक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर का मॉडर्नाइज करना है.
सरकारी दक्षता विभाग (DOGE) ने किन कटौतियों की घोषणा की है-
· मोजाम्बिक में स्वैच्छिक चिकित्सा पुरुष खतना के लिए 10 मिलियन डॉलर
· कंबोडियाई युवाओं के एक समूह को विकसित करने के लिए 9.7 मिलियन डॉलर
· कंबोडिया में स्वतंत्र आवाज को मजबूत करने के लिए 2.3 मिलियन डॉलर
· प्राग सिविल सोसाइटी सेंटर को 32 मिलियन डॉलर
· लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण केंद्र के लिए 40 मिलियन डॉलर
· सर्बिया में सार्वजनिक खरीद में सुधार के लिए 14 मिलियन डॉलर
· चुनाव और राजनीतिक प्रक्रिया के लिए 486 मिलियन डॉलर, जिसमें मोल्दोवा में इंक्लूसिव और पार्टिसिपेटरी पॉलिटिकल प्रोसेस के लिए 22 मिलिन डॉलर और भारत में मतदान के लिए 21 मिलियन डॉलर शामिल हैं
· बांग्लादेश में राजनीतिक परिदृश्य को मजबूत करने के लिए 29 मिलियन डॉलर
· नेपाल में फिस्कल फेडरलिज्म के लिए 20 मिलियन डॉलर
· नेपाल में बायो डाइवर्सिटी कंवर्जेशन के लिए डॉलर 19 मिलियन डॉलर
· लाइबेरिया में वोटर कॉन्फिडेंस के लिए 1.5 मिलियन डॉलर
· माली में सामाजिक सामंजस्य के लिए 14 मिलियन डॉलर
· दक्षिणी अफ्रीका में समावेशी लोकतंत्र के लिए 2.5 मिलियन डॉलर
· एशिया में सीखने के परिणामों में सुधार के लिए 47 मिलियन डॉलर
· कोसोवो रोमा, अश्कली और मिस्र के हाशिए पर पड़े समुदायों के बीच सामाजिक-आर्थिक सामंजस्य बढ़ाने के लिए टिकाऊ रीसाइकल मॉडल विकसित करने के लिए 2 मिलियन डॉलर शामिल.

भारत में मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए 21 मिलियन डॉलर का आवंटन? चुनाव एवं राजनीतिक प्रक्रिया सुदृढ़ीकरण के लिए गठित कंसोर्टियम क्या है जिसके माध्यम से धनराशि भेजने का प्रावधान किया गया?
विकिपीडिया पर एक संक्षिप्त नोट के अनुसार इसे संक्षेप में सीईपीपीएस (CEPPS) कहा जाता है. यह गैर-लाभकारी संगठनों से बना है. इसका घोषित उद्देश्य दुनिया भर में लोकतांत्रिक प्रथाओं और संस्थानों को आगे बढ़ाना और उनका समर्थन करना है. नोट में कहा गया है कि 1995 में स्थापित सीईपीपीएस इंटरनेशनल फाउंडेशन फॉर इलेक्टोरल सिस्टम्स, इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट और नेशनल डेमोक्रेटिक इंस्टीट्यूट का एक संयोजन है.
सीईपीपीएस की एक वेबसाइट थी, लेकिन जब ईटीवी भारत ने इस रिपोर्ट को दर्ज करने के समय इसे एक्सेस करने की कोशिश की तो इस पर लिखा मिला ‘ओह! वह पेज नहीं मिल रहा है.’
अमेरिका का विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों, एजेंसियों और वित्तीय सहायता तंत्रों के माध्यम से दुनिया भर में लोकतंत्र प्रक्रियाओं को प्रभावित करने का एक लंबा इतिहास रहा है. लोकतंत्र को बढ़ावा देने के लिए आवंटित धन आमतौर पर राजनीतिक संस्थानों, नागरिक समाज, मानवाधिकारों और स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों को मजबूत करने की दिशा में निर्देशित होता है.
ऐसा ही एक उदाहरण है यूएस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (USAID)
यूएसएड (USAID) लोकतंत्र को बढ़ावा देने के प्रयासों को लागू करने के लिए गठित की गई. एजेंसी के लोकतंत्र, मानवाधिकार और शासन कार्यक्रम स्वतंत्र चुनाव, नागरिक समाज संगठनों, राजनीतिक दलों और स्वतंत्र मीडिया का समर्थन करते हैं. आम तौर पर अनुदान, अनुबंध और प्राप्तकर्ता देशों में गैर सरकारी संगठनों और स्थानीय संगठनों के साथ प्रत्यक्ष भागीदारी के माध्यम से धन वितरित किया जाता है.
इस साल 20 जनवरी को पदभार संभालने के बाद से ट्रंप ने सभी यूएसएड (USAID) कार्यक्रमों के लिए फंडिंग कैंसिल कर दिया. इसके कारण बड़े पैमाने पर छंटनी हुई है. देश यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि आगे के कार्यक्रमों को कैसे आगे बढ़ाया जाए.
यूएसएड (USAID) के अलावा नेशनल एंडोमेंट फॉर डेमोक्रेसी और रक्षा विभाग (डीओडी) सहित अन्य एजेंसियां भी लोकतंत्र से संबंधित कार्यक्रमों में भूमिका निभाती हैं. इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि भाजपा लंबे समय से भारत की चुनाव प्रक्रिया में विदेशी हस्तक्षेप का आरोप लगाती रही है. उसने सरकारी दक्षता विभाग (DOGE) की घोषणा पर तुरंत प्रतिक्रिया दी है.
सरकारी दक्षता विभाग (DOGE) के इस दावे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता अमित मालवीय ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की. भाजपा नेता ने कहा, ‘मतदाताओं के लिए 21 मिलियन डॉलर? यह निश्चित रूप से भारत की चुनावी प्रक्रिया में बाहरी हस्तक्षेप है. इससे किसे फायदा होगा? निश्चित रूप से सत्ताधारी पार्टी को नहीं!’
यह भी दिलचस्प है कि बांग्लादेश में राजनीतिक परिदृश्य को मजबूत करने के लिए 29 मिलियन डॉलर आवंटित किए गए थे. यह पिछले साल जनवरी में भारत के पूर्वी पड़ोसी देश में आम चुनाव होने के बाद हुआ है जिसमें विपक्ष ने बहिष्कार किया था. इसके बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग चौथी बार सत्ता में आई. विपक्ष ने आरोप लगाया था कि चुनाव समान अवसर पर नहीं हुए थे.
वहीं, शेख हसीना ने दावा किया था कि विदेशी ताकतें, विशेष रूप से पश्चिमी, चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रही थी. शेख हसीना को पिछले साल अगस्त में उनके शासन की निरंकुश शैली के खिलाफ बड़े पैमाने पर विद्रोह के बाद सत्ता से बेदखल कर दिया गया था. अब, जब अमेरिकी सरकारी दक्षता विभाग (DOGE) ने इतनी नाटकीय घोषणा की है, तो यह देखना बाकी है कि जब लोग अपने-अपने देशों में चुनावों के बारे में बात करते हैं तो विदेशी हाथ का क्या मतलब होता है.
