बैजनाथ, 20 अक्टूबर 2025 : हिमाचल प्रदेश की विश्वविख्यात पैराग्लाइडिंग घाटी बीड़-बिलिंग इस वर्ष अपने प्रतिष्ठित वार्षिक आयोजन से वंचित रहने की कगार पर खड़ी नजर आ रही है। अक्टूबर का आधा महीना बीत चुका है, लेकिन न तो बिलिंग पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन (बीपीए) ने कोई बैठक बुलाई है और न ही पर्यटन विभाग ने इस रोमांचक इवेंट को आयोजित करने में कोई रुचि दिखाई है। यह अनिश्चितता न केवल सैकड़ों पायलटों और पर्यटकों के लिए निराशा का सबब बनी हुई है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर डाल सकती है।
बीड-बिलिंग घाटी, जो 1992 से लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिताओं का केंद्र रही है, इस बार खालीपन की चपेट में फंस गई है। एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुराग शर्मा ने बताया, “हर साल अक्टूबर-नवंबर में विश्व कप, प्री-वर्ल्ड कप और नेशनल चैंपियनशिप जैसे बड़े आयोजन होते रहे हैं। इनमें देश-विदेश से शीर्ष पायलट भाग लेते हैं और हजारों दर्शक रोमांच का मजा लेने पहुंचते हैं। लेकिन इस बार बीपीए ने न तो पर्यटन विभाग के साथ कोई बैठक की है और न ही PWCA (पैराग्लाइडिंग वर्ल्ड कप एसोसिएशन) या FAI (फेडरेशन एरोनॉटिक इंटरनेशनल) से किसी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए आवेदन किया है।” शर्मा के अनुसार, विभाग की चुप्पी ने पूरे समुदाय को हताश कर दिया है।
यह घाटी केवल साहसिक खेलों का गढ़ ही नहीं, बल्कि वैश्विक पहचान का प्रतीक भी है। 2015 में यहां आयोजित पहले पैराग्लाइडिंग वर्ल्ड कप ने बिलिंग को अंतरराष्ट्रीय नक्शे पर चमकाया था। उससे पहले 1992 में एक विदेशी पायलट ने यहां विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया था, जो आज भी घाटी की शान है। 32 वर्षों में, कुछ अपवादों को छोड़कर, हर साल दुनिया भर से पायलट यहां अपनी कला का प्रदर्शन करने आते रहे हैं। लेकिन इस बार, मौसम की अनुकूलता के बावजूद, आयोजन की कोई रूपरेखा नजर नहीं आ रही।
आयोजन न होने का सबसे बड़ा नुकसान स्थानीय व्यवसायियों को हो रहा है। बीड़-बिलिंग के होटल, कैफे, टैक्सी सेवाएं और अन्य पर्यटन-संबंधित कारोबार इन्हीं प्रतियोगिताओं पर निर्भर हैं। एक स्थानीय होटल संचालक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हमने अक्टूबर-नवंबर के लिए पहले से बुकिंग की उम्मीद में तैयारी की थी। विदेशी पर्यटक और पायलटों का जमावड़ा होता है, जो पूरे क्षेत्र को जीवंत कर देता है। लेकिन अब अनिश्चितता के कारण कैंसिलेशन हो रहे हैं। अगर आयोजन नहीं हुआ तो सैकड़ों परिवारों की आजीविका पर असर पड़ेगा।”
स्थानीय पायलटों और पर्यटन व्यवसायियों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि जल्दबाजी में भी कोई नेशनल चैंपियनशिप आयोजित की जा सकती है, ताकि घाटी की साख बनी रहे। पर्यटन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, लेकिन स्रोतों के अनुसार, बजट की कमी और अन्य प्राथमिकताओं के कारण आयोजन पर विचार नहीं हो रहा।
बीड-बिलिंग की यह चुप्पी न केवल साहसिक खेलों के भविष्य पर सवाल खड़ी कर रही है, बल्कि हिमाचल के पर्यटन उद्योग की कमजोर कड़ियों को भी उजागर कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह घाटी अपनी चमक खो सकती है। रोमांच प्रेमी अब आशा की किरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं—क्या बिलिंग का आसमान फिर से रंगीन पंखों से सज सकेगा?
