बैजनाथ (कांगड़ा), 18 फरवरी 2026 — हिमाचल प्रदेश के बैजनाथ तहसील के छोटे से हरेड़ गांव की मोनिका अग्रवाल (या मोनिका धरवाल के नाम से भी जानी जाती हैं) ने अपनी लगन, मेहनत और मां शकुंतला देवी के अटूट हौसले से एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित NORCET (Nursing Officer Recruitment Common Eligibility Test) परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), दिल्ली में नर्सिंग ऑफिसर के पद पर चयनित हो गई हैं।
मोनिका के परिवार में 2019 तक सब कुछ सामान्य था। उनके पिता मूलराज एक निजी कंपनी में मैकेनिक के रूप में चंडीगढ़ में कार्यरत थे और परिवार की छोटी-मोटी आमदनी से दो बेटियों, एक बेटे और पत्नी शकुंतला देवी के साथ सुख-संतोष का जीवन व्यतीत कर रहे थे। लेकिन 2019 में अचानक हृदयघात से मूलराज का निधन हो गया। उस समय मोनिका कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में व्यस्त थीं। पिता की मौत ने परिवार की आर्थिक स्थिति को बुरी तरह प्रभावित किया और मोनिका की पढ़ाई पर भी संकट मंडराने लगा।
पिता की अनुपस्थिति में मां शकुंतला देवी ने हिम्मत नहीं हारी। EPF से मिलने वाली महज 2,950 रुपये मासिक पेंशन के बावजूद उन्होंने बेटी की नर्सिंग की पढ़ाई जारी रखने का फैसला किया। मोनिका को जय दुर्गा मां नर्सिंग कॉलेज, जोगिंद्रनगर में दाखिला मिला। आर्थिक तंगी के बावजूद मोनिका ने कॉलेज में शानदार प्रदर्शन किया और प्रथम श्रेणी में परीक्षा उत्तीर्ण की।
मोनिका बताती हैं, “पिता ने जीवनभर मेहनत करके परिवार का पालन-पोषण किया और हमें पढ़ाई के संसाधन उपलब्ध करवाए। उनकी मौत के बाद मां ने संघर्ष का नया अध्याय लिखा। यही मेरे जीवन का टर्निंग पॉइंट था। NORCET परीक्षा मेरे लिए लक्ष्य बन गई और मैंने पहले ही प्रयास में इसे पास कर लिया।”
शकुंतला देवी गर्व से कहती हैं, “मेरी बेटी ने कभी पढ़ाई में हमें निराश नहीं किया। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उसने यह मुकाम हासिल किया, जिससे न सिर्फ मुझे गौरवान्वित महसूस हो रहा है, बल्कि पति के जाने का दर्द भी कुछ कम हुआ है।”
यह सफलता न केवल मोनिका की व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनी है। जहां आर्थिक चुनौतियां अक्सर सपनों को तोड़ देती हैं, वहां मां-बेटी के संयुक्त संघर्ष ने दिखाया कि हौसला और मेहनत से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
तहसील कल्याण अधिकारी आलोक ठाकुर ने बताया कि शकुंतला देवी यदि आवेदन करें तो मुख्यमंत्री विधवा एवं एकल नारी आवास योजना के तहत उन्हें सरकार की ओर से 2.5 लाख रुपये मकान निर्माण के लिए उपलब्ध करवाए जा सकते हैं।
मोनिका की यह कहानी संघर्ष, समर्पण और मातृ शक्ति की जीत की मिसाल है, जो पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।
