बैजनाथ 26 जुलाई
उत्तर प्रदेश के सीतापुर निवासी परमवीर चक्र विजेता मनोज पांडे की शहादत की कहानी भी बेहद रोचक है। शहीद की माता मोहिनी पांडे बताती हैं कि वे छुट्टी आए हुए थे। तब उनकी माता ने कहा कि आप फौजी अफसर हो अपना ख्याल रखना जवानों को आगे रखना। तब पलटकर शहीद मनोज पांडे ने मां को जवाब दिया कि यदि मैं और आप मुश्किल में हों तो आगे कौन रहेगा। उनकी इस बात पर मां ने खुद आगे होने की बात कही तो उन्होंने पलट कर जवाब दिया मेरे जवान मेरे बच्चों की तरह ही हैं। मैं आगे रहूंगा और जवानों को पीछे रखूंगा। पांडे के भाई मनमोहन पांडे बताते हैं कि सैन्य भर्ती के दौरान जब उनसे फौज में आने का जज्बा पूछा गया तो उन्होंने पलटकर एक ही जवाब दिया परमवीर चक्र हासिल करने के लिए। निश्चित तौर पर मनोज पांडे में गजब का जज्बा था। लखनऊ के हसनगंज इलाके में पान की दुकान चलाने वाले मनोज के पिता गोपीचंद पांडे बताते हैं कि मैंने यह कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जिन कंधों पर उठाकर मैं उसे गांव में घुमाया करता था एक दिन उसको शमशान तक वही कांधे ले जाएंगे। करगिल युद्ध के दौरान उन्होंने दुश्मन के बकरों पर अंधाधुंध फायरिंग कर कईयों को मौत के घाट उतार डाला और अंत में शहादत का जाम भी कर सदा के लिए अमर हो गए।
साभार विकास बावा पंजाब केसरी
