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September 6, 2026
Mandi

माता फूंगणी की डायनासौर झील में नहीं हो पाया शाही स्नान

पधर (मंडी)।

मंडी जिला, कांगड़ा, कुल्लु की सीमा में चौहारघाटी और छोटा भंगाल क्षेत्र की अधिष्ठात्री माता फूंगणी की पवित्र डायनासौर झील में इस इस बार 20 भादो के स्नान की रश्म पाबंदी के बीच नहीं निभाई गई। कुल्लु लगघाटी, चौहारघाटी, बरोट और छोटा भंगाल के देवी-देवताओं ने झील की अपवित्रता को लेकर इस बार नाराजगी जताई और देववाणी में स्नान पर रोक लगा दी थी। डायनासौर झील में स्नान न होने की घटना इतिहास में पहली बार देखने को मिली है। झील के आस पास गन्दगी फैलाने को दीवताओं ने कारण बता कर स्नान पर रोक लगाई है। कुछ श्रदालु डायनासौर झील को स्नान करने पाबंदी के बावजूद रवाना हो गए थे, जो खराब मौसम के बीच झील तक नहीं पहुंच पाए।
गौरतलब रहे कि डायनासौर झील की लोगों में काफी मान्यता है। दंत कथाओं के अनुसार भगवान शिव और पार्वती चंद्रताल, सूरजताल झील होते हुए जब मणिमहेश के लिए जाते थे तो डायनासौर नामक जगह पर रुकते थे । इस स्थान पर एक डायन का कब्जा था। शिव और पार्वती जब यहां पर रुके तो आधी रात डायन ने भगवान शिव को युद्ध के लिए ललकारा तो उन्होंने उसका वध कर दिया। इसके बाद इस जगह का नाम डायनासौर पड़ा है।

माता फूंगणी के गुर देवी सिंह और धमच्यान पंचायत के उपप्रधान नरेश बंटा ने कहा कि देवस्थलों को देवस्थल ही रहने दिया जाए। इनमें किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले कोरोना का मुश्किल दौर आया तब भी देवी- देवताओं ने हमारी रक्षा की। अब आपदा में फिर से देवी-देवता हमारा आसरा बने हैं। उन्होंने कहा कि देवी- देवताओं के आदेश के मुताबिक 20 भादों का स्नान डायनासौर में नहीं होगा इसका श्रद्धालुओं ने आस्था पूर्वक पालन किया है। यही कारण है कि इस बार देवी देवताओं ने प्राकृतिक आपदा में घाटी के लोगों की रक्षा की है।

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