शिमला: हिमाचल प्रदेश में अब ग्रामीण क्षेत्रों में बिना अनुमति के मकान निर्माण पर सख्ती लागू होने जा रही है। नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के नए नियमों के तहत मकान बनाने से पहले नक्शा तैयार करना और उसे मंजूर करवाना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने और अनियोजित निर्माण पर लगाम लगाने के लिए लागू की जा रही है।
पहली बार लागू होगी यह व्यवस्था
प्रदेश सरकार ने बीते तीन वर्षों में आपदाओं के कारण हुए नुकसान को देखते हुए यह कदम उठाया है। पहली बार ग्रामीण क्षेत्रों में मकान निर्माण के लिए नक्शा मंजूरी की अनिवार्यता लागू की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य सुनियोजित विकास को बढ़ावा देना और आपदा के दौरान होने वाले नुकसान को न्यूनतम करना है।
पंचायतों को मिलेगा अनुमति देने का अधिकार
नए नियमों के तहत ग्राम पंचायतों को मकान निर्माण की अनुमति देने का अधिकार दिया जाएगा। छोटे मकानों के लिए साधारण नक्शा तैयार कर पंचायत से मंजूरी ली जाएगी। वहीं, 600 वर्ग मीटर से बड़े भवनों के लिए नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग से अनुमति लेनी होगी। पंचायत सचिवों को भी इस प्रक्रिया में विशेष शक्तियां प्रदान की जाएंगी।
अनियोजित निर्माण पर लगेगी रोक
ग्रामीण क्षेत्रों, खासकर शहरी इलाकों से सटे गांवों में बिना नक्शा मंजूरी के कई मंजिला भवन और होटल बन चुके हैं। इन पर अब तक कोई नियंत्रण नहीं था। नए नियमों से पंचायतों को नक्शा मंजूरी की प्रक्रिया से आय का स्रोत भी मिलेगा और अनियोजित निर्माण पर अंकुश लगेगा।
आपदा से नुकसान कम करना लक्ष्य
नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य सुनियोजित विकास को बढ़ावा देना और आपदाओं में होने वाले नुकसान को कम करना है। उन्होंने बताया कि नियमों के अनुसार मकान निर्माण से गांवों में व्यवस्थित और सुरक्षित ढांचे तैयार होंगे।
यह कदम न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण की गुणवत्ता को बेहतर करेगा, बल्कि आपदा प्रबंधन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
