शिमला, जिसे कभी अंग्रेजों ने अपनी ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में चुना था, आज अनियोजित विकास और अवैज्ञानिक निर्माण के कारण असुरक्षित हो चुका है। 1881 की पहली ब्रिटिश जनगणना में शिमला की जनसंख्या मात्र 13,605 थी, जो अब बढ़कर लगभग 2,45,000 हो चुकी है। यह शहर अपनी वहन क्षमता से कहीं अधिक बोझ उठा रहा है। अंग्रेजों ने शिमला को व्यवस्थित ढंग से बसाया था, जिसमें भवनों को कम जगह और आंगनों को अधिक स्थान दिया गया। नालों और खड्डों का ध्यान रखा गया ताकि पानी का बहाव बाधित न हो। लेकिन आज स्थिति उलट है। तंग गलियों में मकान सटे हुए हैं, और आवाजाही के लिए भी जगह नहीं बची।
ब्रिटिशकालीन भवन मजबूत, नई इमारतें ढह रही ब्रिटिश काल में बने भवन आज भी मजबूती से खड़े हैं, लेकिन हाल के वर्षों में बनी बहुमंजिला इमारतें बारिश और भूस्खलन के कारण धराशायी हो रही हैं। अगस्त 2023 में भारी बारिश के चलते समरहिल में शिव बावड़ी मंदिर मलबे में दब गया, जिसमें 21 लोगों की जान गई। उसी दौरान कृष्णानगर में नगर निगम का स्लाटर हाउस सहित 8 मकान ढह गए। शिमला सिस्मिक जोन 4 में आता है, जहां भूकंप के तेज झटकों से भारी नुकसान की आशंका बनी रहती है। यूएनडीपी की रिपोर्ट के अनुसार, शहर के 65% भवन उच्च संवेदनशील श्रेणी में हैं, जबकि 51% क्षेत्र मध्यम और 33% उच्च भूस्खलन जोखिम में हैं।
अवैध निर्माण और रिटेंशन नीतियां शिमला में अवैध निर्माण को नियमित करने के लिए 2009, 2016, 2019, 2023 और 2025 में रिटेंशन नीतियां लाई गईं। 2016 में 15,000 अनधिकृत भवनों को नियमित किया गया, और 2025 में नगर निगम ने वन टाइम सेटलमेंट का प्रस्ताव पारित किया। पर्यावरण कार्यकर्ता देवेन खन्ना के अनुसार, कनलोग समिट्री जैसे हेरिटेज जोन में कब्रें उखाड़कर 14 अवैध ढांचे बनाए गए, जिन्हें हटाने के लिए हाईकोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा।
शहर की बदहाल स्थिति संजौली के समिट्री में शवों को खिड़कियों से निकालना पड़ता है, और मिडल समिट्री में बीमार व्यक्ति को सड़क तक ले जाना मुश्किल है। नालों के लिए जगह नहीं छोड़ी गई, जिससे बारिश का पानी हर ओर बहता है। पूर्व आईएएस अधिकारी श्रीनिवास जोशी कहते हैं कि शिमला पैदल चलने वालों का शहर था, लेकिन अब वाहनों की भीड़ ने इसे असुरक्षित बना दिया है। वे सुझाव देते हैं कि हेरिटेज जोन का स्वरूप बनाए रखा जाए। वहीं, इंजीनियर आरएस जस्टा जाठिया देवी में सैटेलाइट टाउन बसाने की वकालत करते हैं ताकि शिमला की भीड़ कम हो।
सरकारी प्रयास और चुनौतियां नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी के अनुसार, शिमला सहित प्रदेश के शहरी क्षेत्रों की सैटेलाइट आधारित जीआईएस मैपिंग की जाएगी। क्षेत्र आधारित नियोजन और नियमों को लागू करने पर जोर दिया जा रहा है, जिसमें जनसहयोग की जरूरत है।
शिमला की प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक विरासत को बचाने के लिए सख्त निर्माण नीतियों और उनके प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता है। अनियोजित विकास और अवैध निर्माण ने शहर को खतरे में डाल दिया है। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह पर्यटकों का पसंदीदा शहर अपनी पहचान और सुरक्षा दोनों खो सकता है।
